त्रिफला चूर्ण से करे कब्ज का इलाज : { राजीव दीक्षित जी }

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कब्ज का इलाज राजीव दीक्षित जी द्वारा -रात को अगर त्रिफला आप ले रहे हैं, दूध के साथ, घी के साथ या गरम पानी के साथ तो यह रेचक मतलब यह एक ही काम सबसे ज्यादा करेगा की आपकी कब्जियत मिटा देगा चाहे कितनी भी पुराणी कब्ज हो यह उसे जड़ से मिटा देगा. चालीस साल पुरानी कब्ज को भी मिटा सकता हैं.

तो सब तरह के जूस, दूध, दही, छाछ यह सब वातनाशक चीजे हमारे घरों में आसानी से मिल जाती हैं.अब आखिरी चीज बागवती जी कहते हैं की वातनाशक, पित्तनाशक और कफनाशक ऐसी चीजें दुनिया में एक साथ मिले ऐसा असंभव हैं.

  • वो कहते हैं की दुनिया में बहुत चीजें कोई वात का नाश कर रहा हैं, कोई कफ का कर रहा हैं. लेकिन वह नहीं जानते की कोई ऐसी चीजें भी हर व्यक्ति के घरे की रसोई में हैं जो इन तीनो का नाश करती हैं, वह भी एक साथ.
  • उनमे से नम्बर एक हैं आंवला, फिर दूसरा हैं हरड़े, और तीसरा हैं बहेड़ा इन तीनो को मिलाया जाए तो बनता हैं त्रिफला. और यह जो त्रिफला हैं ना बागवती जी इसकी इतनी बढ़ाई करते हैं, इतनी ढेर साड़ी प्रशंसा उन्होंने इसके बारे में लिखी हैं की सिर्फ त्रिफला पर ही उनके 120 से ज्यादा सूत्र हैं.
  • त्रिफला को इसके साथ खाओ त्रिफला को उसके साथ खाओ ऐसे ही 120 से ज्यादा सूत्र लिखे हैं उन्होंने त्रिफला पर. और वह यह कहते हैं की यह जो त्रिफला जो हैं इसमें सबसे अच्छा फल आंवला फिर बहेड़ा फिर हरड़े यह सबसे दुनिया अचूक चीज हैं.

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कब्ज के लिए चूर्ण में सबसे अच्छा हैं त्रिफला

कब्ज का इलाज राजीव दीक्षित

  • लेकिन इसकी मात्रा के बारे में उन्होंने जो कहा उसके बारे में ध्यान रखिये. ज्यादातर लोग त्रिफला का इस्तेमाल करते हैं, करिये बहुत अच्छा हैं लेकिन मात्रा का ध्यान रखिये हम क्या करते हैं की हरड़, बहेड़ा आंवला तीनो बराबर मात्रा में मिलाकर त्रिफला बनाते हैं और वो कहते हैं की यह उतना उपयोगी नहीं हैं.
  • और हमने करके भी देखा वो कहते हैं की त्रिफला सबसे अच्छा होता हैं. एक दो तीन के अनुपात में पहला हैं हरड़े एक अनुपात, दूसरा हैं बहेड़ा दो अनुपात में, और तीसरा हैं आंवला तीन अनुपात में अब इसको मात्रा में कहूं. अगर त्रिफला बनाना हैं तो हरड़े लेना हैं 100 ग्राम, बहेड़ा लेना 200 ग्राम और आंवला लेना 300 ग्राम.
  • तो यह 100,200,300 ग्राम की मात्रा में आप जो त्रिफला चूर्ण तैयार करेंगे. वो कहते हैं की यह अद्भुत हैं वाट पित्त कफ तीनो का नाशक होता हैं. वात, पित्त, कफ इन तीनो से अगर आप ग्रसित हैं तो आप त्रिफला जरूर लीजिये.

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कैसे लें –

  • त्रिफला लेने के दो नियम बताये जाते हैं एक रात को सोते समय और सुबह उठने के बाद. सुबह का उनका नियम यह हैं की सुबह-सुबह अगर त्रिफला खाये तो गूढ़ के साथ नहीं तो शहद के साथ. गूढ़ या शहद. और अगर रात का त्रिफला खाये तो दूध के साथ या गर्म पानी के साथ.
  • और बागवट जी इसके बारे में कहते हैं की इनको इस तरह लेने से इनके असर अलग-अलग हो जाते हैं. रात को जो आप त्रिफला खाएंगे दूध के साथ या गर्म पानी के साथ तो यह रात के समय लिया गया त्रिफला रेचक हैं रेचक यानी पेट को साफ़ करने वाला, बड़ी आंत की सफाई करने वाला, शरीर के सभी अंगों की सफाई करने वाला. उदाहरण के लिए झाड़ू लगाने वाला व्यक्ति वो रेचक हैं.
  • तो रात को अगर आप त्रिफला लें रहे हैं दूध के साथ या गरम पानी के साथ तो यह रेचक हैं, यानी यह एक ही काम सबसे ज्यादा करेगा की आपकी कब्जियत को जड़ से मिटा देगा. चाहे कितनी भी पुरानी कब्जियत हो मिटा देगा.

रात में लिया गया त्रिफला चूर्ण कब्ज दूर करता हैं

  • और जो दिन को सुबह के समय त्रिफला खाया जाता हैं दूध के साथ तो वह कहते हैं यह पोषक हैं. एक शब्द हैं रेचक और एक शब्द हैं पोषक. पोषक यानी शरीर को जो कुछ चाहिए Vitamin A चाहिए, Vitamin D चाहिए या Vitamin E चाहिए कोई सा भी विटामिन चाहिए, कोई सा भी पदार्थ चाहिए आदि तो इसका मतलबा हुआ शरीर को पोषकता चाहिए.
  • तो त्रिफला को सुबह के समय खाये. और अगर आप मानते हैं की शरीर से कब्जियत ख़त्म करना हैं तो त्रिफला रात को खाये. दोनों तरह के त्रिफला में बिलकुल अलग तरह के परिणाम हैं, अलग फायदे हैं. तो जो व्यक्ति कहते हैं की हमे कब्ज नहीं हैं तो वह त्रिफला को सुबह के समय खाये, और अगर आपको कोई बीमारी हैं तो रात को खाये.

कब और कितना खाये त्रिफला

  • रात को तो आप लें पेट साफ़ करना हो, कब्ज दूर करना हो, देखिये में आपको थोड़ा बताहि दूँ. बवासीर अगर किसी को हैं और अगर वह त्रिफला से इसे ठीक करना चाहते हैं तो उनको त्रिफला रात के समय लें. भगन्दर को भी ठीक करने के लिए त्रिफला को रात के समय ही लें.
  • यानी मेरे कहने का मतलब यह हैं की अगर आपको पेट से जुड़ी कोई बीमारी हैं तो त्रिफला को रात के समय लें. एक चम्मच छोटी दूध के साथ या गर्म पानी के साथ और अगर आपको मांस कम करना हैं, कफ नाशक बीमारियां कफ से जुड़ी बीमारियां दूर करनी हैं तो सुबह. खाने के बाद लेंगे रात को और सुबह लेंगे खाने के पहले, सिर्फ खाने के ही नहीं बल्कि नाश्ता करने से पहले यानी खाली पेट. सुबह नाश्ता करने से 40 मिनट पहले त्रिफला लें.
  • इससे आपको कई फायदे होंगे. कब्ज में तो रात को ही त्रिफला का गर्म दूध या गर्म पानी के साथ सेवन करे.

कब्ज की होम्योपैथिक दवा राजीव दीक्षित

Silicea 200 नामक एक होम्योपैथिक दवा होती हैं जो की पुराने से पुराने कब्ज को आंतों में फंसे मल को सिर्फ आधे घंटे के अंदर ही बाहर निकाल देती हैं. इस दवा की तीन बूंदो को दस-दस मिनट के इंटरवल में 3 बार उपयोग करे. इससे पेट में उफान सा आजायेगा और सारा मल जो की पेट में कई महीनो से जमा होगा सभी एक साथ बाहर निकल जाएगा.

तो यह रहा कब्ज का इलाज राजीव दीक्षित कब्ज का समाधान का, इस दवा को आप किसी भी होम्योपैथिक की दुकान पर जाकर खरीद सकते हैं, साथ उनसे आप यह भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं की इसको कब्ज में किस तरह से लेना हैं. वैसे तो हमने इसकी खुराक बताहि दी हैं लेकिन फिर भी आप अपने मन के संदेह को दूर करने के लिए उनसे भी सलाह ले सकते हैं.

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आयुर्वेद एक असरकारी तरीका है, जिससे आप बिना किसी नुकसान के बीमारी को ख़त्म कर सकते है। इसके लिए बस जरुरी है की आप आयुर्वेदिक नुस्खे का सही से उपयोग करे। हम ऐसे ही नुस्खों को लेकर आप तक पहुंचाने का प्रयास करते है - धन्यवाद.